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विनम्र श्रद्धांजलि भारत के जाबाज़ वीरों को - नीता झा

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जीवन सफल कर गए.. देश की माटी के लाल।। सारे हक अदा कर गए.. पर रहेगा सदा ये मलाल।। काल का कुचक्र था वो.. कुछ पन्ने कोरे छोड़ गए।। लौटने के वादे भी होंगे.. कहीं कुछ इरादे भी होंगे।। कहानियों में सारे के सारे.. अंतिम सिसकियां दे गए।। वजहें पूछता मन विपदा.. क्यों कर सब पर आ पड़ी।। क्या थे वो बहाने मौत के.. कैसे इतने जांबाज़ चले गए।। सभी जवानों और रावत दम्पत्ति को शत शत नमन 

जन रामायण - नीता झा

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आप सभी के आशीर्वाद से इस गरिमामयी आयोजन का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिल रहा है सभी को सादर अभिवादन करती हूं-नीता झा भगवान श्री राम की स्तुति को श्रंखलाबद्ध करने में मेरी भी छोटी सी कविता को स्थान मिला है। आशा करती हूं कार्यक्रम बहुत ही सफल होगा देखिएगा ज़रूर.....