गुरुपूर्णिमा पर गुरुदेव को नमन - नीता झा
गुरु की महत्ता को नमन करने का पर्व गुरु पूर्णिमा,इस पावन पर्व में सभी गुरुजनो को नमन... मनुष्य में जन्मजात प्रवृति होती है;अपने आस पास के परिवेश को देख, सुन,महसूस करके सिखने की। नवजात शिशु पढ़ना, लिखना,बोलना नही जानता किन्तु जन्म से ही सिखने की सतत प्रक्रिया मृत्यु पर्यन्त चलती ही रहती है। जब हमे यह समझ आने लगता है कि हमारी शिक्षा का कोई नाम मिलने लगा है; तो हम वहां से अपनी शिक्षा की गणना करने लगते हैं। जबकि गुरु तो प्रकृति भी है। जड़ , चेतन, दृश्य,अदृश्य ,छोटे,बड़े,अपने,पराए जिनसे भी हम कुछ भी सीखते समझते हैं वही तो गुरु है । हम जीवन के अलग- अलग पड़ावों में कुछ न कुछ सीखते ही रहते हैं अब हमपर निर्भर करता है; हम किससे और क्या सीख रहे हैं । जो हम सीखते हैं समाज देश और हमारे परिवेश पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है। अर्थात सीधे शब्दों में कहें तो हम अपशब्द सीख रहे हैं अथवा भजन हमपर निर्भर करता है । विभिन्न समय व परिस्थितियों में हमारे ग्रहण किए हुए ज्ञान के मतलब भी बदल जाते हैं। दोनों ही अर्थ सही होते हैं जैसे हम...