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बुलंदी वृहद कविसम्मेलन - नीता झा

 साहित्यिक यात्रा..... सुखद साहित्यिक यात्रा...... एक गर्वित सुखद साहित्यिक काव्यात्मक यात्रा..... बुलंदी समूह के संचालक श्री विवेक बादल बाजपुरी  जी हां बुलंदी के साथ जुड़े भारतीय कवियों तथा कवित्रियों के साथ ३४ अलग - अलग देश के भारतीय बंधुओं ने विगत वर्ष के स्वयं में बनाए २०७ दो सौ सात घण्टे के कीर्तिमान को तोड़ते हुए विश्व के सबसे बड़े कविसम्मेलन यानी अबतक ३३० तीन सौ तीस घण्टे से अधिक समय के कविसम्मेलन को समाचार लिखे जाने तक जारी रखा है। देखने वाली बात है कि यह श्रंखला और कितनी वृहत हो सकती है। इस सफल कविसम्मेलन  में  रायपुर छत्तीसगढ़ की श्रीमती नीता झा ने भी हिस्सा लिया और विविध विषयों पर अपनी स्वरचित कविता का पाठ किया।   इस आयोजन में भारत के कवियों के अतितिक्त ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, थाईलैंड, सऊदी अरब, जकार्ता, इंडोनेशिया, पुर्तगाल, कतर इत्यादि लगभग ३४ देश के लोगों ने भी बड़े उत्साह से हिस्सा लिया।  नीता झा रायपुर, छत्तीसगढ़    

हमारी हिंदी - नीता झा।

माँ की लोरी सी मधुर... जब हिंदी कंठ सजाती है।। सात सुरों से सजी धजी... पंचम सुर को भाती है।। दिए जलाए पानी लाएं... जब राग चरम पर होते हैं।। विश्व शांति की संवाहक हो... जो साहित्य मुखरित होते हैं।। सकल जगत को शांत करें... शक्ति का न कभी दम्भ भरें।। शिशुओं सी सुकोमल हिंदी... मन को सहज हर लेती है।। किन्तु कभी जो आए विपत्ति... विविध भाषाओं की जननी ये।। सब मे सहज घुलमिल जाती है... कालजयी रचनाएं गढ़ कर फिर।। चहुं ओर विजय पताका फहरा... युवाओं में देशभक्ति जगाती है।। मातृभूमि की बेड़ियां काट जब... विजय माँ भारती के भाल लगा।। हिंदी की महिमा द्विगुणित हुई... जब हिंदी की बिंदी माथ सजी।। सारी वसुधा को गौरान्वित करती... शान से खनकती हमारी हिंदी।। नीता झा रायपुर, छत्तीसगढ़