प्रकृति का वरदान" हरियाली" १ - नीता झा
"संकट की घड़ी से बड़ा शिक्षक और कोई नहीं होता" थोड़े बहुत शाब्दिक हेर-फेर के साथ हम सभी ने इस तरह की बातें सुनी, पढ़ी हैं। हमारे बड़ों की समझाइश में। अब लगता है कोरोना वायरस रूपी संकट हमे जीवन के हर क्षेत्र में सतर्क रहने और मितव्यता का ध्यान रखने की शिक्षा दे रहा है। वर्तमान समय में आमदनी और संसाधनों की लगातार कमी हो रही है। साथ ही सीमित समय के लिए बाहर निकलकर भी अपने आप को सुरक्षित रखने की चिंता में हम प्रायः पहले की तरह सहजता से काम नहीं कर सकते और अभी ये भी नहीं पता ये स्थिति आगे सुधरेगी या और बढ़ेगी ऐसी दशा में हमे अपने स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा सजग रहना होगा हमे ऐसी दिनचर्या की भी आदत डालनी है। जो हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाए। तो आइये हम अपने आसपास ऐसी तमाम सुविधाओं, संसाधनों पर नजर डालें। जिन्हें हम अपनी दिनचर्या में शामिल करके स्वस्थ रह सकते हैं। साथियों हमारे घर में दो महत्वपूर्ण कक्ष होते हैं एक तो रसोई दूसरा पूजाघर। इन दोनों में हमारे सेहत के ख़ज़ाने होते हैं। बस उनका सही तरीके से और सही ...