बदरा रानी - नीता झा


चमक - गरज कर खेल रही थी..
बीती रात गगन में बदरा रानी।।
काले मेघों का कर सिंगार फिर..
उन्हें नचा रही थी बदरा रानी।।

खिला चाँद भी मुदित बहुत था
किरणों की आभा से धूल हटाता
नीता झा



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