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ये रिश्ते - नीता झा

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बड़े जतन और प्यार से... गुंथी है माला प्यार की।। न बिखरे इसे ध्यान दो… मिलकर इसे सम्हाल लो।। हर मोती हैं बेशकीमती... छुटकी हो या लाल हो।। बिखर गए तो क्या करोगे... सारे तुम्हारे जान से प्यारे।। जोड़ लो बढ़कर फिर से... अपने रिश्तों के मनके।। सुलझाना ही तो है बस... सुलझ जाएगा सारा कुछ।। बस इत्मीनान से वक्त देदो... कुछ जो ठीक नहीं खुद में।। कुछ मीत की कमियों पर... घुलमिल कर तुम काम करो।।  बड़े जतन से फिर हौले हौले... दोनों अन्तस् पर ध्यान धरो।। बनाओ प्रीत की फिर से डोर... बड़े जतन और प्यार से।। गंथो हीर माला दोनों प्यार की... कभी न बिखरे ध्यान दो।। जी हाँ वो प्यार भरा रिश्ता, वो कसमो भरी बातें, मुलाकातें वो कभी न बिछड़ने का प्रयास कैसे धीरे - धीरे अपना स्वरूप बदलने लगता है । समय पर ध्यान न दें तो कोई नितांत अपना हमसे दूर होने लगता है। सम्बन्ध चाहे कोई भी हो, रिश्ता चाहे जितना भी निकट का हो जब बना है तो एक मजबूत ढांचा तो होगा ही फिर पति - पत्नी का रिश्ता तो सबसे मजबूत भी और सबसे नाजुक रिश्ता होता है।इस रिश्ते को बाहरी नमी से बचाइए यानी अपने अंतरंग रिश्ते में बाहरी लोगों को अनावश्...

योगाभ्यास और स्वास्थ्य - नीता झा

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  "खेल - कूद से शक्ति मिले, योग भगाए रोग" श्रेष्ठ कर्म युक्त जीवन मिले, जब काया रहे निरोग"।       हमारी प्राचीन स्वास्थ्यगत विधाओं में योग एवं खेलों का  विशेष महत्व रहा है। ऊर्जावान स्वस्थ जीवन की आधारशिला ही योग एवं खेलकूद हैं।        खेल और योग को यदि बचपन से बच्चों के जीवन में सम्मिलित किया जाए तो उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है। जिससे उनपर उचित प्रभाव पड़ता है।        गुनगुने जल का उखड़ू बैठ कर सेवन करने के पश्चात शौचादि से निवृत हो कर खाली पेट रह कर , प्रातःकाल किया गया  योगाभ्यास तथा विभिन्न खेलों का अभ्यास अभ्यासियों को श्रेष्ठ परिणाम दायक होता है।   देखा गया है कि ऐसे बच्चे बचपन से ही अनुशासित, ऊर्जावान, कर्मठ, फुर्तीले और आशावादी होते हैं जिससे वे जीवन मे आने वाली परेशानियों तथा चुनोतियों का सहजता से सामना करते हैं।         योग तथा खेलों का प्रशिक्षण कुशल प्रशिक्षक की देख - रेख में होना चाहिए जिससे बच्चे की आयु, शारीरिक क्षमता, के साथ ही उचित, अनुचित आहार - विहार ...

रिश्तों की डोर - नीता झा।

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रिश्तों की डोर उलझने लगे.. अपना ही साया दूर होने लगे।। रुको जरा सा विश्राम करो.. फिर मनोयोग से सुलझाओ।। कुछ सलवटें ही तो हैं कुछ.. गांठें ही तो हैं ठीक होंगी।। रिश्ते में तकलीफ ही नहीं.. बेशुमार हंसी पल भी गुजारे।। उन्हें वापस जीवन मे लाओ.. ज़िन्दगी फिर खुशनुमा होगी।। प्रायः हमारे आसपास अपने से रिश्ते टूटने - चटखने की मनोदशा में दिखते हैं। उन सभी अपनो को बिखरते देखना बड़ा पीड़ादायक होता है। जब हम उन्हें महसूस करके इतने उदास हो जाते हैं तो उनकी तकलीफों का सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है।     हर रिश्ते की बनावट ठीक आंखों की तरह  एक सी मालूम पड़ती हुई किंतु सर्वथा भिन्न होती है। ऐसे में सभी को अपने अपनों को समझने के लिए पूर्वाग्रहों से मुक्त होना पड़ेगा सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए अपने दाम्पत्य जीवन का ईमानदारी से स्वयं निरीक्षण करके जहां भी किसी भी तरह की कमी है या जहां अधिकता है। उन सभी भावनाओं, कर्तव्यबोध, आर्थिक, शारीरिक अथवा मानसिक स्थितियों में संतुलन बनाने पर ध्यान देना चाहिए।    अपने साथी का चयन पूरी दुनियां से चुन कर आपने और आपके अपनो ने किया है। त...

कुछ गमले हरेभरे राहत लिए - नीता झा

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कुछ गमले हरेभरे राहत लिए... मेरे आंगन की शोभा बढ़ाते।। अपनी कोमल टहनी से देते... खिली सुबह भेंट रंग रंगीली।। अलसाई अलसुबह उनींदी...  दर्शन सूर्यदेव के करती हूं।।   पास हवाओं संग बतियाते... झूम झूम मुझे देख दर्शाते।। किसलय की कोमल बाहों से... ताजे सुवासित फूल मुस्कुराते।। जब भी इनके पास मैं जाऊं... मेरी थकन ये झट हर लेते।। कुछ गमले हरेभरेे राहत लिए... मेरे आंगन की शोभा बढ़ाते।। फुदक-फुदक चिड़िया आती... तितली भी फूलों पे मंडराती।। इन्हें देख नन्ही किलकारी जब... मचल मचल गोदी से फिसलती।। मेरे सारे जीवन को बड़े प्यार से... माँ रूपेण प्रकृति रानी संवरे।। कुछ गमले हरेभरे राहत लिए... मेरे आंगन की शोभा बढ़ाते।। नीता झा